नर्मदेश्वर शिवलिंग / नर्मदा शिवलिंग (Narmadeshwar Shivling / Narmada Shivling)

नर्मदेश्वर शिवलिंग / नर्मदा शिवलिंग (Narmadeshwar Shivling / Narmada Shivling)

मां नर्मदा की गोद मे से निकलने वाले हर एक कंकड़ पत्थर को शिवलिंग माना जाता है, इसे ही नर्मदेश्वर शिवलिंग / नर्मदा शिवलिंग कहते हैं। नर्मदेश्वर शिवलिंग में सम्पूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा समाहित है| यह साक्षात शिव का रूप माना जाता है । नर्मदेस्वर शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती है| नर्मदेश्वर शिवलिंग को सीधे ही मां नर्मदा से निकालकर घर एवं मंदिर में स्थापित किया जा सकता है। नर्मदेश्वर शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग भी कहा जाता है| क्योंकि यह मां नर्मदा से बहाव के कारण घूमते घूमते गोल हो जाता है| इसलिए यह शिवलिंग स्वयं बनता है तथा इसको स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग ( Swayambhu Narmadeshwar Shivling ) भी कहा जाता है| नर्मदा पुराण और शिव पुराण के अनुसार नर्मदेश्वर शिवलिंग को बाणालिंग (Banalinga) भी कहा जाता है| नर्मदेश्वर शिवलिंग अंडाकार के रूप में पूजा जाता है|

मां नर्मदा नदी ( Narmada River ) से निकलने वाले हर एक पत्थर को नर्मदेश्वर शिवलिंग या बाणालिंग भी कहा जाता है ।

दुनिया का यही एकमात्र पत्थर है जो शिवलिंग ( Shivling ) के रूप में पूजा जाता है|

जो अन्य शिवलिंगो की अपेक्षा बहुत ही शक्तिशाली और पवित्र रूप मे माना जाता है।

नर्वदेश्वर शिवलिंग में बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा होती है जो हमारे घर और मंदिर में निरंतर प्रवाहित होती रहती है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा (Glory Of Narmadeshwar Shivling)

narmadeshwar shivling ki mahima

नर्मदेश्वर शिवलिंग (Narmadeshwar Shivling) भगवान भोलेनाथ का ही रूप माना जाता है।

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव के द्वारा मां नर्मदा जी को वरदान दिया गया था| वरदान था की आपके अंदर से निकलने वाले हर एक कंकड़ को इस संसार में मनुष्य शिवलिंग के रूप में पूजेंगे। इसी कारन नर्मदेश्वर शिवलिंग की सम्पूर्ण विश्व में पूजा होती है|

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हम कई प्रकार के जप – तक और तपस्या – साधना करते हैं जबकि आज के कलयुग में भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है|

मां नर्मदा से प्राप्त नर्मदेश्वर शिवलिंग की घर में स्थापना करके पूजा करना चाहिए। नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा से शिव शंकर जल्दी प्रसन्ना होते है यही नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा (Glory Of Narmadeshwar Shivling) है|

 

नर्मदेश्वर शिवलिंग को नर्मदा बाणालिंग क्यों कहते हैं।   (Why Is Narmadeshwar Shivling Called Narmada Banalinga)


भारत में कई नदियां बहती है। इनमें से एक नदी है मां नर्मदा, नर्मदा नदी (Narmada River) का उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक से होता है|

यह बहते हुए गुजरात से होकर गुजरात में खंभात की खाड़ी में जाकर समुद्र में मिलती है।

त्रेता युग और द्वापर युग के कल से मां नर्मदा को सदैव पूजनीय माना जाता है|

इसलिए नर्मदा के अंदर और किनारे पर पाए जाने वाले कंकड़ पत्थर को शिव शंकर के पूरी श्रद्धा के साथ पूजन अभिषेक करते हैं|

इसलिए शास्त्रों और पुराणों में कहा गया है “नर्मदा नदी का हर एक कंकड़ शंकर है” (every Pebble In The Narmada River Is Shankar)

प्रतिदिन हजारों लाखों भक्त गण मां नर्मदा की प्रति दिन आरती पूजा  करते हैं|

और कई लोगअपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मां नर्मदा की परिक्रमा भी करते हैं|

इस परिक्रमा को “नर्मदा परिक्रमा” (Narmada Parikrama) कहा जाता है।

बाणासुर नाम का एक असुर था उसी के नाम से नर्वदेश्वर शिवलिंग का नाम बाणालिंग रखा गया है। प्राचीन काल की कथा है बाणासुर नाम का एक दानव जो भगवान भोलेनाथ का बहुत ही बड़ा भक्त था|

पूरे भाव से भक्ति करता था । वैसे तो बाणासुर भक्तराज पहलाद के कुल का एक असुर था लेकिन भगवान में भी आस्था रखता था और शिव को ईस्ट मानकर उसकी भक्ति और पूजा करता था।

एक बार की बात है बाणासुर ने भगवान शंकर की हजारों साल तक घोर तपस्या की |

जिससे प्रसन्न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए और कहा कि वरदान मांगो।

तब बाणासुर ने भगवान शंकर के कहने पर भगवान शिव शंकर से कहा कि मुझे शिवलिंग प्रदान कीजिए .

मुझे वर् दीजिए कि आप सदैव इस शिवलिंग में साक्षात रुप से मेरे साथ विराजमान रहेंगे| तभी भगवान शंकर ने शिवलिंग का निर्माण किया और बाणासुर को वरदान स्वरुप प्रदान कर दिया। तभी से इस शिवलिंग का नाम बाणलिंग हो गया|

तब भगवान भोलेनाथ ने कहा तथास्तु।

तभी से भगवान शंकर उस शिवलिंग में विराजमान रहते हैं| बाणासुर खुश होकर शिवलिंग अपने साथ में ले गया तथा उस शिवलिंग को अमरकंठ नामक पर्वत पर विराजमान कर दिया और पूजा अर्चना करने लगा|

वह नित्य प्रतिदिन इस शिवलिंग की पूजा करता और पूजा करने से वह सुख शांति प्राप्त करता। एक बार यह शिवलिंग पर्वत से गिरकर नीचे बहाने वाली नदी में गिर गया ।

जिस नदी में शिवलिंग गिरा था वह मां नर्मदा नदी थी और शिवलिंग राक्षस बाणासुर का था इसलिए इस शिवलिंग को बाना लिंग भी कहते हैं|

इसलिए इसका नाम बाणलिंग रखा गया और नर्मदा में बहने के कारण नर्मदेश्वर शिवलिंग भी कहा जाता है।

इसी नर्मदेश्वर शिवलिंग को बनालिंगा कहा जाता है

 

नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना कैसे करें (How To Install Narmadeshwar Shivling)

• नर्वदेश्वर शिवलिंग की स्थापना ऐसी जगह कभी भी नहीं करें जहां पर कोई आता-जाता ना हो या वहां पर कमरा हमेशा बंद रहे।

• नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा में एक लोटा जल चंदन चावल गुलाल और बेलपत्र फूल चढ़ाकर भी साधारण तरीके से कर सकते हैं|

• नर्मदे स्वर शिवलिंग घर में स्थापना के लिए अंगूठे के साइज का ही रखें| वैसे तो 2 इंच से लेकर 6 इंच तक का रख सकते हैं| लेकिन 2 इंच का शिवलिंग और 4 इंची की उसकी जलहरि होनी चाहिए| घर में ज्यादा बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए| बल्कि छोटा सा नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित करना चाहिए| शिव लिंग की लंबाई व्यक्ति के अंगूठे के बराबर होनी चाहिए| तो यह वास्तु के अनुसार बहुत ही शुभ होता है|

• शिवलिंग पर कभी भी तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए और ना ही उसका भोग लगाना चाहिए| तुलसी पत्र के साथ भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम की स्थापना कीजिए।

• नर्मदेस्वर शिवलिंग की स्थापना किसी भी दिशा में कर सकते हैं लेकिन                                                                                                                                                       उसकी जलहरि का मुख्य हमेशा उत्तर दिशा में ही होना चाहिए।

 

 

नर्वदेश्वर शिवलिंग की स्थापना के फायदे  (Benefits Of Installing Narmadeshwar Shivling)

Narmadeshwar Shivling Ki Mhima

 

• घर में अगर वास्तु दोष है तो नर्वदेश्वर शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं नर्वदेश्वर शिवलिंग की पूजा करने से वास्तु दोष खत्म होता है|

• किसी भी प्रकार की मन की इच्छा को पूर्ण करने के लिए मनकामेश्वर शिवलिंग मतलब नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए| नर्वदेश्वर शिवलिंग की पूजा करने से मन की इच्छाएं पूर्ण होती है|

• पंचामृत चढ़ाने से विद्यार्थियों का मस्तिष्क तेज होता है पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर 5 तत्वो से शिवलिंग की पूजा करें।

• नर्वदेश्वर शिवलिंग सकारात्मक शिवलिंग है नर्मदा शिवलिंग को घर में स्थापित करें और नित्य पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है| घर में सभी की सोच पॉजिटिव होती है रुके हुए काम पूर्ण होते हैं।

• नर्मदा शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से मधुमेह की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है।

• पुत्र की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की साधना करें और घर में नर्मदे से शिवलिंग स्थापित करके उसकी नित्य पूजा करें|

• नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना घर में करने से आप भय से मुक्त हो जाते हैं मन में आत्मविश्वास की वृद्धि होती है भाई से मुक्त हो जाते है|

• अगर आप किसी काम को बहुत दिनों से कर रहे हैं और काम नहीं बन रहा है काम नहीं हो पा रहा है तो आप नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा कीजिए| नर्मदेस्वर शिवलिंग की पूजा करने से हर बिगड़े काम पूर्ण हो जाते हैं।

नर्मदेश्वर शिवलिंग पर एक लोटा जल चडाने से किशी भी प्रकार के रोग से मुक्ति पा सकते है |

 

 

 

नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा विधि (worship of Narmadeshwar shivling)

नर्मदेस्वर शिवलिंग अपने आप बना हुआ एक स्वयंभू शिवलिंग है।

जिसको किसी भी प्रकार के मंत्र विधि या प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती है |

यह अपने आप में सिद्ध शिवलिंग है और आप सभी भली-भांति जानते हैं कि नर्मदेश्वर शिवलिंग में स्वयं भगवान शिव विराजमान रहते हैं|

नर्मदा नदी से प्राप्त सभी प्रकार के कंकड़ पत्थर शंकर का रूप होते हैं|

इसलिए आप नर्मदा से प्राप्त शिवलिंग को सीधे ही अपने घर एवं मंदिर में स्थापित कर सकते हैं उसे प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती।

• सबसे पहले प्रातः स्नान करके लूंगी या रुमाल धारण करें।

पूजा करने से पहले यह ध्यान रखे की शिवलिंग का मुख उत्तर दिशा में ही होना चाहिए |

शिवलिंग पर कभी भी कुमकुम और तुलसी नहीं चदाये|

• शिवलिंग को घर में स्थापित करने के पूर्व यह ध्यान रखें कि शिवलिंग की वेदी का मुंह हमेशा उत्तर दिशा में होना चाहिए।

• आप नर्मदेश्वर शिवलिंग केवल ग्राम बकावाॅ से ही खरीदें जो मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक छोटासा गांव है बकावाॅ। ग्राम बकवा में ही ओरिजिनल नर्वदेश्वर शिवलिंग निकलते हैं।
• अगर आप नर्मदेश्वर शिवलिंग घर में स्थापित करना चाहते हैं तो 2 इंच से लेकर 6 इंच तक का शिवलिंग घर में रख सकते हैं। घर में नर्मदे स्वर शिवलिंग हाथ के अंगूठे के जितना रख सकते हैं।
• सबसे पहले गणेश जी के ऊपर जल चढ़ाएं अगर आपने घर में गणेश जी नहीं है तो कहीं से भी सबसे पहले गणेश घर में रखें उसके पश्चात शिवलिंग के ऊपर जल चढ़ाएं जल चढ़ाने के बाद दूध दही शक्कर शहद घी से अभिषेक करें तत्पश्चात शुद्ध जल पुनः चढ़ाएं |

 

ओरिजिनल नर्वदेश्वर शिवलिंग (Original Narmadeshwar shivling)



   Original Narmadeshwar Shivling विश्व में कई प्रकार के शिवलिंगों की पूजा की जाती है इनमें सबसे श्रेष्ठ शिवलिंग है | नर्मदेश्वर शिवलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग मां नर्मदा के तल से निकलता है, जो नर्मदा के तल से निकलता है वहीं शिवलिंग ओरिजिनल नर्वदेश्वर शिवलिंग (Original Narmadeshwar shivling) कहलाता है। क्योंकि एकमात्र नर्मदा नदी ऐसी नदी है जिसके हर कंकड़ शंकर के रूप में पूजे जाते हैं | क्योंकि भगवान शिव के अनुसार माँ नर्मदा जी को वरदान प्राप्त है की आपके अंदर से निकलने वाला हर एक कंकड़ भगवान शंकर के रूप में पूजा जाएगा जिसको किसी भी प्रकार के मंत्र या प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती।

इन शिवलिंग को हम नर्मदा से सीधे लाकर अपने घर में स्थापित कर सकते हैं |

नर्मदा से प्राप्त शिवलिंग को विशेष गुण वाला शिवलिंग बताया गया है |

जो अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली शिवलिंग है। जिनको घर में स्थापित करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है |

और घर में सुख शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। यह शिवलिंग मां नर्मदा से प्राप्त होता है इसलिए इसे नर्वदेश्वर शिवलिंग कहा जाता है। नर्मदा में से शिवलिंग अनेक प्रकार के आकार और प्रकार के पाए जाते हैं पहले नर्मदा से पाए जाने वाले शिवलिंग पूर्ण रूप से शिवलिंग के आकार का होता था परंतु अब नर्मदा जी पर कई बांध बन गए हैं |

जिससे मां नर्मदा का बहाव बहुत कम हो गया है जिसके कारण नर्मदा जी में शिवलिंग बनना बंद हो गए हैं।

नर्मदा जी में बहाव ना होने के कारण यह शिवलिंग पूरी तरह से अंडाकार नहीं प्राप्त होते नर्मदा के तल से निकलने वाले पत्थरों को मशीन द्वारा तराश कर गोल और अंडाकार किया जाता है |

हालांकि आज भी इसमें पाए जाने वाले कलर डिजाइन और चिन्ह प्राकृतिक रूप से इन में आते हैं |

लेकिन इनका आकार मशीनों के जरिए कारीगरों द्वारा तराशकर शिवलिंग का आकार दिया जाता है।

नर्वदेश्वर शिवलिंग को तराशने पर शिवलिंग में अनेक प्रकार की आकृतियां प्राकृतिक रूप से उभरती है |

जैसे कि ॐ, तिलक, गणेश की आकृति, त्रिपुंड, जनेऊ, त्रिशूल की आकृति ,सर्प आदि अनेक प्रकार की आकृतियां प्राकृतिक रूप से उभरती है ।

जीन शिवलिंगों में ऐसी आकृतियां होती है उसे हम ओरिजिनल नर्वदेश्वर शिवलिंग (Original Narmadeshwar shivling) कहते हैं |

यह शिवलिंग बहुत ही दुर्लभ शिवलिंग माने जाते हैं। ओरिजिनल नर्मदेश्वर शिवलिंग बहुत ही शक्तिशाली शिवलिंग होता है |

इसमें अनेक प्रकार की प्राकृतिक ऊर्जा होती है जो हमारे घर को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती रहता है।

 

ओरिजिनल नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान  (Identification Of The Original Narmadeshwar Shivling)

Narmadeshwar Shivling Ki Pehchan

नर्मदा नदी के तल से निकलने वाले शिवलिंग को नर्वदेश्वर शिवलिंग कहते हैं  |

नर्मदेश्वर शिवलिंग भगवान शिव शंकर का स्वरूप है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग एक अद्भुत शक्तिशाली शिवलिंग है |

जिसमें ब्रह्मांड की ऊर्जा समाहित है।

नर्वदेश्वर शिवलिंग की इस शक्ति को हम अपने हाथों में महसूस कर सकते हैं |

नर्मदेश्वर शिवलिंग देकने में चमकदार अंडाकार और छेद रहित होना चाहिए , पहले नदी में बहाव तेज होने के कारन ये आशानी से मील जाते थे लेकिन नदी पे बाँदा बनाने से इसका बहाव कम हो गया है जीसके कारण असली नर्मदेश्वर शिवलिंग कम मिलते, यही ओरिगिनल नर्मदेश्वर शिवलिंग की पह्चान है|

जब कभी भी आप नर्मदा नदी पर शिवलिंग निकालने के लिए जाए तो शिवलिंग के ऊपर उभरी हुई आकृतियों को देखकर आप ओरिजिनल नर्वदेश्वर शिवलिंग की पहचान कर सकते हैं |

इन शिवलिंग के ऊपर कई प्रकार की आकृतियां उभरती है जैसे ॐ, तिलक की आकृति, त्रिपुंड की आकृति, जनेऊ की आकृति, गणेश जी की आकृति, त्रिशूल की आकृति नाग की आकृति, अर्धनारीश्वर स्वरूप भगवान की आकृति |

इस प्रकार कई प्रकार की आकृतियां इन शिवलिंगो के उपर प्राकृतिक रूप से उभरती है |

ऐसे शिवलिंग को हम प्राकृतिक नर्मदेश्वर शिवलिंग (Natural Narmadeshwar Shivling) कहते हैं यही असली पहचान है ओरिजिनल नर्मदेश्वर शिवलिंग की |

 

 

नर्वदेश्वर शिवलिंग की कीमत (Price Of Narmadeshwar Shivling)

Narmadeshwar Shivling Price

नर्वदेश्वर शिवलिंग की कीमत उसके आकार और उसमें उभरी हुई आकृति पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे शिवलिंग का आकार बढ़ता है वैसे वैसे शिवलिंग की कीमत भी बढ़ती है |

वैसे तो भगवन शिव लो कोई बेच नहीं सकता और नाही कोई खरीद सकता है ओर नहीं शिवलिंग की कीमत लगा सकता है लेकिन शिवलिंग की दक्छीना देकर हम शिवलिंग को अपना बना सकते है|

परंतु शिवलिंग भले ही छोटा हो लेकिन उसमें उभरने वाली आकृति जितनी स्पस्ट और सुन्दर होगी उतनी ही उसकी कीमत बढ़ती है|

सबसे दुर्लभ और ज्यादा कीमत ॐकार आकृति वाले शिवलिंग की होती है|

जिस शिवलिंग पर भगवान शिव का मंत्र ॐ उभरा हुआ हो वह शिवलिंग सबसे कीमती और शक्तिशाली होता है।

ग्राम बकावां में मेरे द्वारा 1 इंच से लेकर 18 फीट तक के शिवलिंग का निर्माण हो चुका है 1 इंच से लेकर 3 फीट तक का शिवलिंग हमारे पास तैयार रूप से हमारी दुकन पर मिल जाता है |

3 फीट से लेकर 18 फीट तक के शिवलिंग ग्राहक की आवश्यकता अनुसार ऑर्डर पर बनाया जाता है |

ग्राहक की आवश्यकता अनुसार हम नर्मदा के तट से पत्थर लेकर आते हैं तथा उसे मशीनों द्वारा काटकर अंडाकर में शिवलिंग तैयार कर देते हैं | शिवलिंग को हमेशा अंडाकार रूप ही दिया जाता है |

क्योंकि इससे यह शिवलिंग जलहरी पर आसानी से स्थापित हो जाए।

हमारे यहां ₹10 से लेकर 8 लाख तक का शिवलिंग मिल जाता है |

जिसकी कीमत साइज और आकृति पर निर्भर करती है शिवलिंग खरीदने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

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नर्वदेश्वर शिवलिंग कहां मिलता है और कैसे प्राप्त करें  (How Is Fond Narmadeshwar Shivling)

नर्वदेश्वर शिवलिंग नर्मदा नदी के तल से प्राप्त होता है | इसलिए इसे नर्वदेश्वर शिवलिंग कहते हैं नर्मदेश्वर शिवलिंग ओमकारेश्वर से लेकर महेश्वर तक के बीच में ग्राम बकावां में मिलता है|

नर्मदा नदी 1312 किलोमीटर लंबी नदी है| लेकिन नर्मदेश्वर शिवलिंग ग्राम बकावाॅ में ही निकलते हैंबकावाॅ के नर्वदेश्वर शिवलिंग पूरे भारत में तथा विदेशों में भी प्रसिद्ध है |

क्योंकि पूरे विश्व में एकमात्र ग्राम बकावां में ही शिवलिंग निकलते हैं |

नर्मदेश्वर शिवलिंग नर्मदा नदी से निकलता है और ग्राम बकावा में मिलता है|

इसके अलावा पूरे भारत में कहीं पर भी किसी भी नदी से सीधे शिवलिंग नहीं निकलता।

बकावां में पूरे भारत के तथा विदेशों के लोग भी असली नर्मदेश्वर शिवलिंग खरीदने के लिए आते हैं।

अगर आपको नर्वदेश्वर शिवलिंग खरीदना है | तो नर्मदेश्वर शिवलिंग प्राप्त करने के लिए अभी कॉल कर सकते हैं |

नर्वदेश्वर शिवलिंग को पूरे विश्व में से कहीं से भी ऑर्डर किया जा सकता है यह नर्मदेश्वर शिवलिंग हम पूरे विश्व में घर पहुंच के साथ भिजवा देते हैं। नर्वदेश्वर शिवलिंग प्राप्त करने के लिए आज ही आर्डर करें…   Order Now

 

 

अर्धनारीश्वर नर्मदा शिवलिंग किसे कहते हैं और यह कैसा होता है (What Is Ardhanarishwar Narmadeshwar Shivling Called And How Is It)

जैसे की हम जानते हैं मां नर्मदा के तट से कई प्रकार के आकृति वाले शिवलिंग निकलते हैं |

इन शिवलिंगो में से एक शिवलिंग होता है अर्धनारेश्वर शिवलिंगअर्धनारेश्वर नर्मदा शिवलिंग भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप है।

अर्धनारेश्वर शिवलिंग में आधा शरीर शिवजी का और आधा शरीर माता पार्वती का माना जाता है।
अर्धनारेश्वर शिवलिंग किसी भी दो रंग का हो सकता है ।

उदाहरण के लिए लाल और सफेद रंग आधे – आधे रूप में पाए जाने पर यह अर्धनारीश्वर शिवलिंग कहलाता है।
लाल रंग माता पार्वती का स्वरूप होता है और सफेद रंग भगवान भोलेनाथ का स्वरूप होता है।

इन दोनों रंग के संयोजन से अर्धनारीश्वर नर्मदा शिवलिंग का निर्माण होता है। अर्धनारीश्वर शिवलिंग बहुत ही शक्तिशाली शिवलिंग होता है |

इसे घर में स्थापित करने पर घर में सुख शांति और पति पत्नी के बीच मधुर संबंध बने रहते हैं।

खासकर अर्धनारीश्वर शिवलिंग की पूजा गृहस्थ जीवन में पति और पत्नी के बिच प्रेम बना रहे इसलिए की जाती है |

इसलिए हम शिवलिंग के रूप में भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं |

और जलहरि के रूप में माता पार्वती की पूजा करते हैं |

शिव और शक्ति के संयोजन से ही संपूर्ण सृष्टि उत्पन्न हुई है इसलिए भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को जगत के माता पिता का दर्जा दिया गया है।

अर्धनारेश्वर शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही दुख दूर हो जाते हैं और घर में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता रहता है |

इसलिए घर में अर्धनारेश्वर शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए |

4 Responses

  1. अर्द्धनारेश्वर शिवलिंग मन्दिर में 3 का और जल् धारी 5 फिट कि चाहिए

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